हर पल बदलते रिश्ते,
दिल डरता है कि क्या मैं निभा पाउगा, ये रिश्ते
जब भी मेरा मन घबराता है
तो तू थाम लेता है मेरा
और फिर हो जाती है मेरी हर मुश्किल आसां
मैं, मैं तो सरे रास्ते छोड़ बह चला था,
प्यार की वादियों में।
बिना राह, मैं बाँध के इस ओर बंधने लगा।
रिश्तों ने फिर आवाज़ दी॥
पर लौटू कैसे?
मैं तो बंध चुका हूँ।
रिश्तो ने नहर बने...
फिर मुझे वापस ले आए, उस दुनिया में , जो मेरी थी।
jaha मैंने जन्म लिया था॥
२२/१०/2008